लैला मजनू की प्रेम कहानी || laila majanoo kee prem kahaanee

लैला राज घराने से संबध रखती थी वो बहुत सुंदर थी। मजनू ने जब पहली बार उसे देखा तो वो उससे प्यार करने लगा। वो उसकी खूबसूरती पर मरता था। एक दिन वो उससे मिलने उसके महल पंहुचा । वहां जाकर वो उसके कमरे में गया और अपने जेब से पायल निकलकर उसके खूबसूरत पैरों में पहना दी उसके बाद उसने उन पैरों को अपने होठों से चूमा। जब वो दूसरी पायल पहनाने लगा तो लैला ने करवट बदल ली फिर मजनू ने दूसरी पायल नहीं पहने और उसे निशानी समझकर अपने पास रख ली। जब सबेरे राजकुमारी लैला उठी तो उसने अपने पैरों में उस पायल को देखा वो हैरान रह गई। अगले दिन मजनू फिर राजमहल गया और सीधे लैला के कमरे में पहुच गया । वहां जाकर उसने लैला के गालों को छुआ और फिर वो उसके क़दमों में आ गया । तब उसने अपने जब से दूसरी पायल निकलकर उसे पहना दी जब उसके पैरों को चूमने लगा तो लैला ने करवट बदल ली और मजनू ने देखा की लैला के पैर में पायल नहीं थी। उसने कहा की हम तो अपना दिल भी तेरे क़दमों में रख गए और तुने उसे ठोकर मार दी । तभी लैला जाग गई और मजनू को पकड़ लिया। फिर उससे उसके बार में पूछा । उनकी बातचीत कुछ इस प्रकार थी

लैला – तुम कौन हो
मजनू – आपका सेवक
लैला – तुम रहते कहाँ हों
मजनू – आपके चरणों में
लैला- तुम काम क्या करते हो
मजनू- आपकी पूजा

और यह कर मजनू ने लैला के पैरों को चूम लिया। लैला उससे बहुत खुश हुई और वो भी उससे प्यार करने लगी। लैला ने मजनू को अपने पास आने को कहा तो मजनू ने जवाब दिया की वो तो बस आपके क़दमों में अपने उम्र गुजारना चाहता है। इस प्यार का जब लैला के पिता को पता चला तो वो बहुत नाराज हुए उन्होंने मजनू को बुलवाया और उससे कहा की यदि वो चाहे तो वो राजमहल की किसी भी सुंदर से सुंदर दासी को ले जा सकता है पर लैला को भूलने के बाद। मजनू ने उनसे कहा की राजमहल की सभी दासी लैला के चरणों की धुल के समान भी नहीं है और उसे किसी भी दोलत का लालच नहीं है।

इसपर नाराज होकर लैला के पिता ने मजनू को देश निकाल दिया और लैला की शादी किसी राजा के साथ कर दी लैला शादी के बाद अपने पति के साथ इराक चली गयी वो खुश नहीं थी। लैला इराक पहुँच कर बहुत बीमार हो गयी तब वैद ने राजकुमार से मजनू को बुलवाने को कहा । तब राजकुमार ने मजनू को बुलवाया । मजनू राजमहल पहुँच कर लैला के कमरे में जाता है लैला वहां पर सो रही होती है मजनू लैला के पैरों के पास बैठ जाता है और उन्हें चूमने लगता है तभी लैला जाग जाती है और उसे उसके क़दमों से उठने को कहती है तब मजनू कहता है की वो बस अब इन पैरों में ही रहकर इन्हें चूमना चाहता है। तब लैला के बार बार कहने पर मजनू उससे गले मिलता है तभी वहां पर राजकुमार पहुँच जाता है और वो मजनू को लैला के चरणों में देखकर अचम्भे में पद जाते है और वो उन दोनों को आजाद कर देते है जब लैला और मजनू दोनों वहां से चले आते है तो रेगिस्तान में उनपर हमला होता है और लैला वही पर मर जाती है मजनू भी उसके गम में मरने लगता है तो उसे लैला को दिया हुआ वचन याद आता है की वो उसके क़दमों में ही मरेगा तब वो उसके पैरों के पास जाकर उन्हें चूमता हुआ मर जाता है।

वो प्यार आज भी अमर है ऐसे प्रेमी बहुत कम मिलते है जो एक दुसरे के लिए जान भी दे देते है.

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