चटपटी बाल कहानी : असली इनाम

सड़क के इस पार 5 कुत्ते के पिल्ले झुंड में एक-दूसरे से सटे हुए बड़ी ही गुमसुम मुखमुद्रा में बैठे थे। आखिर वजह भी तो वैसी ही थी ना! बात यूं थी कि सड़क के उस पार एक बहुत बड़ा था। बड़ा-सा अहाता था, जो ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था। पाठशाला के प्रवेश द्वार पर भव्य लोहे का दरवाजा बना हुआ था। 
एक बड़ी-बड़ी मूंछों वाला, हट्टा-कट्टा कद्दावर, हाथ में मोटी-सी लाठी लिए दरवाजे पर खड़ा पहरेदारी करता था। कभी जब चौकीदार की नजर बचाकर वे पिल्ले लोहे के दरवाजे में बनी जाली से अहाते के अंदर झांककर देखते तो उनका दिल उछलने लगता था। मैदान में लगे हुए झूले पर बच्चे शोर मचाते हुए झूलते थे, कभी फिसलपट्टी पर किलकारी भरते हुए फिसलते थे, तो कभी गोल वाली चकरी पर बैठकर गोल-गोल घूमते हुए हंस-हंसकर दोहरे हो जाते थे।
बच्चों की ऐसी उधमकूद देखकर वे पिल्ले सोचा करते थे कि काश! ऐसी मस्ती हम भी कर पाते, लेकिन दरवाजे पर खड़ा चौकीदार तो उन्हें पास भी नहीं फटकने देता था। वो ऐसी लाठी घुमाता कि वे ‘क्याऔं क्याऔं’ करते हुए भाग खड़े होते थे।

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